क्या करें जब आपकी प्रेमिका किसी और के बांहों में दिखे या फिर उसकी शादी हो जाये

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जीवन अपूर्ण सा लगने लगता है मृतप्राय सा हो जाता है और टूट ही जाता है इंसान वफ़ा के तमाम किस्से हवा हो जाते है। ईर्ष्या, जलन और नफरत की आग में व्यक्ति झुलसने लगता है। इन अनुभव से गुजरकर व्यक्ति या तो ईश्वर बन जाता है या दानव। इन अनुभवों का लाभ लेना ज्यादा अच्छा होता है। अनेक लोग खुद को ईश्वर की भांति मानते है क्योंकि अनेको के दुःख दूर हुवे और उनकी जीवन बदल गयी और अनेक लोग खुद दानव मानते है क्योंकि कुछ बातें उनकी धारणाओं को तोड़ती है उनके मान्यताओं को ठेश पहुंचाती है। मनुष्य की श्रेणी मे रखना कोई नही चाहता क्योंकि वो द्वन्दों में नही उलझना चाहता उसे कर्तव्यकर्मो का ज्ञान है और वह योग और भोग के महाव्रत से दूर है।

ऐसे बोलिये कि मुझे जो सही लगता है मैं वही करता हूँ अंतरात्मा की आवाज को सुनता हूँ। हर किसी को आप सन्तुष्ट नही कर सकते है। गीता का वह श्लोक जैसे जो मुझे जिस प्रकार भजता है मैं उसे उसे प्रकार भजता हूँ क्योंकि सभी जो मुझसे जुड़े है मेरा अनुसरण करते है।

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः।।

वास्तव में इच्छा अपेक्षा और समर्पण कौन नही चाहता है, परन्तु करुणा इन सब से ऊपर है और यही व्यवहारिकता का मूल है। पुष्प के पौधे से प्रेम का अर्थ ये नही है कि उसे बचाने के लिये अंधेरे में रख दो।  करुणा चाहिये कार्यो के लिये,जीवन के लिये।

जीने के लिये कुछ आसान सी थ्योरी है
1.Theory of acceptance
2.Theory of preference
3.Be practical

वो लड़की किसी और कि बांहो में है क्योंकि उसे वो पसन्द है। तुम्हारा प्रेम उसे सन्तुष्ट नही कर रहा। उसकी शादी हो गयी तो वो नये जीवन मे प्रवेश कर गयी तुम्हारे लाइफ में वापस नही आयेगी। जीवन का हर मार्ग अंतिम नही होता। प्रेम की असफलता भी बहुत कुछ सीखा जाती है । पूर्णता कभी भी मजेदार नही होता क्योंकि पूर्णता तो मृत्यु समान है। प्रेम में सब मिल जाये तो आप चाहेंगे कि इसमें मजा नही छोड़ो ये सब, इसीलिये कमी की भी अपनी महत्ता है।

हम सभी जीवन को समझने का प्रयास करते है।यही जीवन के प्रति दृष्टिकोण तो दर्शन है, वास्तव में मनुष्य को जब तक हम संतोष और आनन्द नही दे पा रहे इसका कोई लाभ नही। आत्मा, ब्रह्म, योग, पुनर्जन्म, अद्वैत, मृत्यु इन सब बातों पर चर्चा तब हो जब व्यक्ति इन जीवन के मायाजाल को ध्यान से समझ ले, जो कि इतना आसान नही तो मायाजाल से ही आनन्द को प्राप्त करे, इसकी भी व्यवस्था होनी चाहिये।

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